हीनयान-महायान श्वेताम्बर-दिगंबर शैव-वैष्णव शिया-सुन्नी कैथोलिक-प्रोटेस्टेंट और न जाने कितने एक से आधे आधे से पाव हुए . जोड़-तोड़ हुए मोल-भाव हु…
कुनमुनाता भाव बनने को अभाव विचलित है प्रचलित है - "साहित्य समाज का दर्पण है " सूखे फूलों सा पवित्र नदी में अर्पण है .
सबसे छोटा, छोटा, बड़ा, उससे बड़ा, उससे और बड़ा बाकी चीजों के लिए तय कर दो, सबसे बड़ा कमरा होगा किताबों का ,
गोल सिक्कों से जुदा चौकोर चपल चटक पंजी, छुटकपने में सबसे छोटी और सबसे बड़ी मटक पंजी.
चाक चौबंध हैं ऊँचे घराने खात्मे के लिए अस्त्रों की होड़ . करते बैठकें जी तोड़ .
Social Plugin