open_music · manav yogi hai योग | yoga | युगों युगों से युगों युगों तक जीवन में है योग कि मानव योगी है .
तुम्हारे स्पर्श से उपजा होगा संवेदना का ज्वार जो अब तक मेरे ज़हन में उछाल मारता है इसी की हिलोरें मेरे ही तट को भिगाती हैं मेरे …
तुम्हारे आँसुओं की बूँदें मेरी मुस्कुराहट में स्वाद भरती हैं . मेरे साथ मेरी बारिशें भी तुमको याद करती हैं .
खाली वक्त अगर मिले तो दबे पाँव उठती हुई पीर को देखो . काम अनेकों मिल जाएँगे अपने अन्दर सोये हुए कबीर को देखो .
मंजिलों का शौक रखने वाले रास्तों से यारी नहीं करते . अँधेरा चाहे कितना भी घना क्यों न हो जुगनुओं की सवारी नहीं करते .
क़दमों को छोटा किया था धीमा किया था अपनी चाल को . बेटे से सुर मिलाने के लिए पिता ने बदला था अपनी ताल को .
मज़लूम का हाथ छोड़ने वालों को अहमियत का तकाज़ा न मिला . उम्र बीत गई दरगाह पकड़े-पकड़े ऐसों को कभी ख्वाज़ा न मिला .
बीचों बीच से शुरू होते हो तुम मेरी शुरुआत होती है किनारों से . इक अख़बार हूँ मैं , मेरी कीमत बसूली जाती है तुम्हारे इश्तेहारों से .
जब तक तुम जिन्दा हो हम सब्र पकड़े रहेंगे . तुम्हारे मरने के बाद तुम्हारी कब्र पकड़े रहेंगे .
हीनयान-महायान श्वेताम्बर-दिगंबर शैव-वैष्णव शिया-सुन्नी कैथोलिक-प्रोटेस्टेंट और न जाने कितने एक से आधे आधे से पाव हुए . जोड़-तोड़ हुए मोल-भाव हु…
फूटा नहीं बस चटका था एक बार कभी भटका था बन गया था इश्क में पानी बादलों से जा लटका था जमीं पर गिरा था जूं बनकर वक्त ने जुल्फों को झटका था घुट रहा था ख…
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